निर्मित मकान में रिसाव की पुष्टि, सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने ठेकेदार पर लगाया ₹25 हजार का हर्जाना

निर्मित मकान में रिसाव की पुष्टि, सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने ठेकेदार पर लगाया ₹25 हजार का हर्जाना

Commission Confirmed the Leakage in the Constructed House

Commission Confirmed the Leakage in the Constructed House

चंडीगढ़, 4 फरवरी: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने निर्माण किए गए मकान में पानी के रिसाव सहित अन्य खामियों की पुष्टि होने पर ठेकेदार को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए ₹25 हजार मुआवजा अदा करने के आदेश दिए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि विधिवत नोटिस की तामील के बावजूद आरोपी पक्ष न तो आयोग के समक्ष उपस्थित हुआ और न ही उसने कोई लिखित जवाब दाखिल किया। ऐसे में आयोग ने माना कि आरोपी पक्ष ने लगाए गए आरोपों का प्रतिवाद नहीं किया है। आयोग ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद तस्वीरों से यह स्पष्ट है कि निर्माण कार्य में खामियां हैं, विशेष रूप से लिंटल (लेंटर) में पानी का रिसाव गंभीर दोष है।

हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी विशेषज्ञ रिपोर्ट या विशेषज्ञ के शपथ-पत्र के अभाव में यह नहीं कहा जा सकता कि निर्माण कार्य भुगतान की गई राशि से कम मूल्य का या अत्यंत घटिया गुणवत्ता का है। इसी कारण से पूरी राशि की वापसी का दावा स्वीकार नहीं किया गया। इसके बावजूद, लिंटल में पानी के रिसाव को गंभीर कमी मानते हुए आयोग ने ठेकेदार को सेवा में दोषी ठहराया और शिकायतकर्ता को ₹25 हजार मुआवजा देने के निर्देश दिए।

मामला चंडीगढ़ सेक्टर-42 निवासी महिला नरेश कुमारी से जुड़ा है, जिन्होंने मकान निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दायर की थी। शिकायत में बताया गया कि जफरपुर स्थित उनके मकान के निर्माण के लिए स्थानीय ठेकेदार राज कुमार और उसके भाई पवन कुमार को ₹15 लाख में ठेका दिया गया था, जिसके लिए शिकायतकर्ता ने ₹9 लाख का ऋण भी लिया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार ठेकेदार की मांग पर किश्तों में भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त भी कुछ राशि दी गई, जिसे आरोपी पक्ष ने हस्तलिखित नोट के माध्यम से स्वीकार किया। हालांकि ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य को पूर्ण बताया गया, जबकि वास्तव में मकान अधूरा था और उसमें कई गंभीर खामियां पाई गईं।

शिकायतकर्ता ने बताया कि मकान के लेंटर से पानी का रिसाव हो रहा था, फर्श असमतल थी और सीढ़ियों का निर्माण भी गलत पाया गया। बाद में नियुक्त एक अन्य मिस्त्री ने भी इन खामियों की पुष्टि की। प्रारंभ में आरोपी पक्ष ने कमियां दूर करने और अतिरिक्त राशि लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में ऐसा नहीं किया।

आयोग ने माना कि इन परिस्थितियों में शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जो सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।